कश्यप

ब्रज डिस्कवरी, एक मुक्त ज्ञानकोष से
(संस्करणों में अंतर)
यहां जाएं: भ्रमण, खोज
पंक्ति 1: पंक्ति 1:
 
{{menu}}<br />
 
{{menu}}<br />
 
==कश्यप / [[:en:Kashup|Kashup]]==
 
==कश्यप / [[:en:Kashup|Kashup]]==
 +
*प्राचीन वैदिक ॠषियों में प्रमुख ॠषि, जिनका उल्लेख एक बार [[ॠग्वेद]] में हुआ है। अन्य संहिताओं में भी यह नाम बहुप्रयुक्त है। इन्हें सर्वदा धार्मिक एंव रह्स्यात्मक चरित्र वाला बतलाया गया है एंव अति प्राचीन कहा गया है।
 +
*[[ऐतरेय ब्राह्मण]] के अनुसार उन्होंने 'विश्वकर्मभौवन' नामक राजा का अभिषेक कराया था। ऐतरेय ब्राह्मणों ने कश्यपों का सम्बन्ध [[जनमेजय]] से बताया गया है।
 +
*[[शतपथ ब्राह्मण]] में [[प्रजापति]] को कश्यप कहा गया हैः "स यत्कुर्मो नाम। प्रजापतिः प्रजा असृजत। यदसृजत् अकरोत् तद् यदकरोत् तस्मात् कूर्मः कश्यपो वै कूर्म्स्तस्मादाहुः सर्वाः प्रजाः काश्यपः।"
 +
*[[महाभारत]] एवं [[पुराण|पुराणों]] में असुरों की उत्पत्ति एवं वंशावली के वर्णन में कहा गया है की [[ब्रह्मा]] के छः मानस पुत्रों में से एक '[[मरीचि]]' थे जिन्होंने अपनी इच्छा से कश्यप नामक प्रजापति पुत्र उत्पन्न किया।
 +
*कश्यप ने दक्ष प्रजापति की 17 पुत्रियों से विवाह किया। दक्ष की इन पुत्रियों से जो सन्तान उत्पन्न हुई उसका विवरण निम्नांकित है -
 +
#[[अदिती]] से [[आदित्य]] (देवता)
 +
#[[दिति]] से दैत्य
 +
#दनु से दानव
 +
#काष्ठा से अश्व आदि
 +
#अनिष्ठा से गन्धर्व
 +
#सुरसा से राक्षस
 +
#इला से वृक्ष
 +
#मुनि से अप्सरागण
 +
#क्रोधवशा से सर्प
 +
#सुरभि से गौ और महिष
 +
#सरमा से श्वापद (हिंस्त्र पशु)
 +
#ताम्रा से श्येन-गृध्र आदि
 +
#तिमि से यादोगण (जलजन्तु)
 +
#[[विनता]] से [[गरुण]] और तरुण
 +
#कद्रू से नाग
 +
#पतंगी से पतंग
 +
#यामिनी से शलभ
 +
*[[भागवत पुराण]], [[मार्कण्डेय पुराण]] के अनुसार कश्यप की तेरह भांर्याएँ थीं। उनके नाम हैं-
 +
#दिति
 +
#अदिति
 +
#दनु
 +
#विनता
 +
#खसा
 +
#कद्रु
 +
#मुनि
 +
#क्रोधा
 +
#रिष्टा
 +
#इरा
 +
#ताम्रा
 +
#इला
 +
#प्रधा।
 +
*इन्हीं से सब सृष्टि हुई।
 +
*कश्यप एक गोत्र का भी नाम है। यह बहुत व्यापक  गोत्र है। जिसका गोत्र नहीं मिलता उसके लिए कश्यप गोत्र की कल्पना कर ली जाती है, क्योंकि एक परम्परा के अनुसार सभी जीवधारियों की उत्पत्ति कश्यप से हुई।
 
*एक बार समस्त [[पृथ्वी]] पर विजय प्राप्त कर [[परशुराम]] ने वह कश्यप मुनि को दान कर दी। कश्यप मुनि ने कहा-'अब तुम मेरे देश में मत रहो।' अत: गुरू की आज्ञा का पालन करते हुए परशुराम ने रात को पृथ्वी पर न रहने का संकल्प किया। वे प्रति रात्रि में मन के समान तीव्र गमनशक्ति से महेंद्र पर्वत पर जाने लगे। <ref>बाल्मीकि रामायण, बाल कांड, सर्ग 76, श्लोक 11-16</ref>
 
*एक बार समस्त [[पृथ्वी]] पर विजय प्राप्त कर [[परशुराम]] ने वह कश्यप मुनि को दान कर दी। कश्यप मुनि ने कहा-'अब तुम मेरे देश में मत रहो।' अत: गुरू की आज्ञा का पालन करते हुए परशुराम ने रात को पृथ्वी पर न रहने का संकल्प किया। वे प्रति रात्रि में मन के समान तीव्र गमनशक्ति से महेंद्र पर्वत पर जाने लगे। <ref>बाल्मीकि रामायण, बाल कांड, सर्ग 76, श्लोक 11-16</ref>
 
*[[सत युग]] में [[दक्ष]] प्रजापति की दो कन्याएं थी- कद्रू तथा विनता। उन दोनों का विवाह महर्षि कश्यप के साथ हुआ। एक बार प्रसन्न होकर कश्यप ने उन दोनों को मनचाहा वर मांगने को कहा। कद्रू ने समान पराक्रमी एक सहस्त्र नाग-पुत्र मांगे तथा विनता ने उसके पुत्रों से अधिक तेजस्वी दो पुत्र मांगे। कालांतर में दोनों को क्रमश: एक सहस्त्र, तथा दो अंडे प्राप्त हुए। 500 वर्ष बाद कद्रू के अंडों के नाग प्रकट हुए। विनता ने ईर्ष्यावश अपना एक अंडा स्वयं ही तोड़ डाला। उसमें से एक अविकसित बालक निकला जिसका ऊर्ध्वभाग बन चुका था, अधोभाग का विकास नहीं हुआ थां उसने क्रुद्ध होकर मां को 500 वर्ष तक कद्रू की दासी रहने का शाप दिया तथा कहा कि यदि दूसरा अंडा समय से पूर्व नहीं फोड़ा तो वह पूर्णविकसित बालक मां को दासित्व से मुक्त करेगा। पहला बालक [[अरूण]] बनकर आकाश में [[सूर्य]] का सारथि बन गया तथा दूसरा बालक [[गरूड़]] बनकर आकाश में उड़ गया।  
 
*[[सत युग]] में [[दक्ष]] प्रजापति की दो कन्याएं थी- कद्रू तथा विनता। उन दोनों का विवाह महर्षि कश्यप के साथ हुआ। एक बार प्रसन्न होकर कश्यप ने उन दोनों को मनचाहा वर मांगने को कहा। कद्रू ने समान पराक्रमी एक सहस्त्र नाग-पुत्र मांगे तथा विनता ने उसके पुत्रों से अधिक तेजस्वी दो पुत्र मांगे। कालांतर में दोनों को क्रमश: एक सहस्त्र, तथा दो अंडे प्राप्त हुए। 500 वर्ष बाद कद्रू के अंडों के नाग प्रकट हुए। विनता ने ईर्ष्यावश अपना एक अंडा स्वयं ही तोड़ डाला। उसमें से एक अविकसित बालक निकला जिसका ऊर्ध्वभाग बन चुका था, अधोभाग का विकास नहीं हुआ थां उसने क्रुद्ध होकर मां को 500 वर्ष तक कद्रू की दासी रहने का शाप दिया तथा कहा कि यदि दूसरा अंडा समय से पूर्व नहीं फोड़ा तो वह पूर्णविकसित बालक मां को दासित्व से मुक्त करेगा। पहला बालक [[अरूण]] बनकर आकाश में [[सूर्य]] का सारथि बन गया तथा दूसरा बालक [[गरूड़]] बनकर आकाश में उड़ गया।  

16:21, 13 दिसम्बर 2009 का संस्करण


कश्यप / Kashup

  1. अदिती से आदित्य (देवता)
  2. दिति से दैत्य
  3. दनु से दानव
  4. काष्ठा से अश्व आदि
  5. अनिष्ठा से गन्धर्व
  6. सुरसा से राक्षस
  7. इला से वृक्ष
  8. मुनि से अप्सरागण
  9. क्रोधवशा से सर्प
  10. सुरभि से गौ और महिष
  11. सरमा से श्वापद (हिंस्त्र पशु)
  12. ताम्रा से श्येन-गृध्र आदि
  13. तिमि से यादोगण (जलजन्तु)
  14. विनता से गरुण और तरुण
  15. कद्रू से नाग
  16. पतंगी से पतंग
  17. यामिनी से शलभ
  1. दिति
  2. अदिति
  3. दनु
  4. विनता
  5. खसा
  6. कद्रु
  7. मुनि
  8. क्रोधा
  9. रिष्टा
  10. इरा
  11. ताम्रा
  12. इला
  13. प्रधा।


टीका-टिप्पणी

  1. बाल्मीकि रामायण, बाल कांड, सर्ग 76, श्लोक 11-16
  2. महाभारत, आदिपर्व, अध्याय 16, 20 । अ0 23 श्लोक 1 से 3 तक भा0 2।11।12।–
  3. महाभारत, आदिपर्व, अध्याय 28, अ0 29 श्लोक 1 से 14 तक, अ0 30, श्लोक 32 से 52 तक अध्याय 32, 33, 34
  4. ब्रह्म पुराण, 100 ।-



निजी टूल
नामस्थान
संस्करण
क्रियाएं
सुस्वागतम्
टूलबॉक्स
अन्य भाषाएं