केतु

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केतु / Ketu

वैदूर्य रत्नं तैलं च तिलं कम्बलमर्पयेत्।
शस्त्रं मृगमदं नीलपुष्पं केतुग्रहाय वै॥

केतु की शान्ति के लिये

वैदिक मन्त्र-

'ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेश से। सुमुषद्भिरजायथा:॥',

पौराणिक मन्त्र-

'पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥',

बीज मन्त्र-

ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: केतवे नम:।', तथा

सामान्य मन्त्र-

ॐ कें केतवे नम:' है। इसमें किसी एक का नित्य श्रद्धापूर्वक निश्चित संख्या में जप करना चाहिये। जप का समय रात्रि तथा कुल जप-संख्या 17000 है। हवन के लिये कुश का उपयोग करना चाहिये। विशेष परिस्थिति में विद्वान ब्राह्मण का सहयोग लेना चाहिये।

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