गीता 1:3

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गीता अध्याय-1 श्लोक-3 / Gita Chapter-1 Verse-3

प्रसंग-


पाण्डव सेना की व्यूहरचना दिखलाकर अब दुर्योधन तीन श्लोकों द्वारा पाण्डव सेना के प्रमुख महारथियों के नाम बतलाते हैं


पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम् ।
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ।।3:1।।



हे आचार्य ! आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपद पुत्र धृष्टद्युम्न द्वारा व्यूहाकार खड़ी की हुई पाण्डु पुत्रों की इस बड़ी भारी सेना को देखिये ।।3।।

Behold, master, the mighty army of the sons of Pandu arrayed for battle by your talented pupil, Dhristadyumna, son of Drupada.(3)


तब = आपके; धीमता= बुद्विमान्; शिष्येण = शिष्य; द्रुपदपुत्रेण = द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न द्वारा; व्यूढाम् = व्यूहाकार खड़ी की हुई; पाण्डुपुत्राणाम् = पाण्डुपुत्रों की; एताम् = इस; महतीत् = बड़ी भारी; चमूम् = सेना को; पश्य = देखिये



अध्याय एक श्लोक संख्या
Verses- Chapter-1

1 | 2 | 3 | 4, 5, 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17, 18 | 19 | 20, 21 | 22 | 23 | 24, 25 | 26 | 27 | 28, 29 | 30 | 31 | 32 | 33, 34 | 35 | 36 | 37 | 38, 39 | 40 | 41 | 42 | 43 | 44 | 45 | 46 | 47

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