ज्ञान वापी

ब्रज डिस्कवरी एक ज्ञानकोश
यहां जाएं: भ्रमण, खोज

ज्ञान वापी / Gyan Vapi

यो वाप्यां धर्मराजस्य, मथुरायास्तु पश्चिमै।
स्थानं करोति तस्यां तु, ग्रहदोर्षनं लिप्यते।।* - वराह पुराण

अर्थात जो लोग मथुरा के पश्चिम में स्थित धर्मराज की ईशवापी बावड़ी में स्नान करते हैं, उनके सारे ग्रह–दोष दूर हो जाते हैं एवं भगवत भक्ति होती है।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. सतयुग कौ इक तीरथ कहौ, वापी ज्ञानभक्तिकों लहों।
    यामं जों स्नान करैजू, धोई पाप बहु पुन्य भरैजू।। (कविवर हरिलाल ककोर की मथुरा परिक्रमा , पृष्ठ–9 विक्रमी 2800)
निजी टूल
नामस्थान
संस्करण
क्रियाएं
भ्रमण
टूलबॉक्स
अन्य भाषाएं
सुस्वागतम्