दुर्वासा

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*एक बार [[द्रौपदी]] नदी में स्नान कर रही थी। कुछ दूर पर दुर्वासा भी स्नान कर रहे थे। दुर्वासा का अधोवस्त्र जल में बह गया। वे बाहर नहीं निकल पा रहे थे। द्रौपदी ने अपनी साड़ी में से थोड़ा-सा कपड़ फाड़कर उनको दिया। फलस्वरूप उन्होंने द्रौपदी को वर दिया कि उसकी लज्जा पर कभी आंच नहीं आयेगी।<ref> शिव पुराण, 7 । 25-26 ।-</ref>
 
*एक बार [[द्रौपदी]] नदी में स्नान कर रही थी। कुछ दूर पर दुर्वासा भी स्नान कर रहे थे। दुर्वासा का अधोवस्त्र जल में बह गया। वे बाहर नहीं निकल पा रहे थे। द्रौपदी ने अपनी साड़ी में से थोड़ा-सा कपड़ फाड़कर उनको दिया। फलस्वरूप उन्होंने द्रौपदी को वर दिया कि उसकी लज्जा पर कभी आंच नहीं आयेगी।<ref> शिव पुराण, 7 । 25-26 ।-</ref>
  
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==सम्बंधित लिंक==
 
==सम्बंधित लिंक==

07:25, 29 अगस्त 2010 का संस्करण

दुर्वासा / Durvasa

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. महाभारत, वनपर्व, अध्याय 262 से 263 तक,दान धर्मपर्व, अध्याय 159
  2. शिव पुराण, 7 । 25-26 ।-

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