पुलह

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*वर्णन मिलता है- 'ये महर्षि [[शिव]] जी के बड़े भक्त थे। इन्होंने [[काशी]] में पुलहेश्वर नामक लिंग की स्थापना की, जो अभी तक है। इनकी भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान शिव ने अपना श्रीविग्रह प्रकट किया था।'
 
*वर्णन मिलता है- 'ये महर्षि [[शिव]] जी के बड़े भक्त थे। इन्होंने [[काशी]] में पुलहेश्वर नामक लिंग की स्थापना की, जो अभी तक है। इनकी भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान शिव ने अपना श्रीविग्रह प्रकट किया था।'
 
*पुलह ऋषि का वर्णन [[पुराण|पुराणों]] और अन्य ग्रंथों में मिलता है। लगातार जप, तप करने में लीन रहने वाले पुलह ऋषि ने जगत को आध्यात्मिक, आधिदैविक और  आधिभौतिक शान्ति प्रदान करने का कार्य किया।
 
*पुलह ऋषि का वर्णन [[पुराण|पुराणों]] और अन्य ग्रंथों में मिलता है। लगातार जप, तप करने में लीन रहने वाले पुलह ऋषि ने जगत को आध्यात्मिक, आधिदैविक और  आधिभौतिक शान्ति प्रदान करने का कार्य किया।
 
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06:53, 8 जुलाई 2010 का संस्करण

पुलह ऋषि / Pulah

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