बाह्मण ग्रन्थों के भाष्यकार

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भाष्यकार

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सायणाचार्य मन्त्र-संहिताओं के समान ब्राह्मणग्रन्थों के भी प्रामाणिक भाष्यकार हैं। जैमिनीय शाखा के सामवेदीय ब्राह्मणों और गोपथ ब्राह्मण को छोड़कर सभी उपलब्ध ब्राह्मणों पर उनके भाष्य प्राप्त हैं। सम्प्रति ब्राह्मणग्रन्थों को समझने में उनके भाष्यों से हमें सर्वाधिक सहायता मिलती है। कारण यह है कि वैदिक तत्वों के तो मर्मज्ञ वे थे ही, यज्ञविद्या के भी सैद्धान्तिक और प्रायोगिक पक्षों का गहन ज्ञान उन्हें था। इसीलिए ब्राह्मणों की व्याख्या करते समय वे मात्र शब्दार्थ दे देने तक अपने को सीमित नहीं रखते, अपितु कर्मकाण्डीय पद्धति के आवश्यक अंश भी देते चलते हैं। तुलनात्मक दृष्टि से अन्य ब्राह्मणों के अंश भी उद्धृत कर देते हैं, साथ ही यथास्थान सूत्र ग्रन्थों के सन्दर्भ भी संगृहीत कर पाठक की भलीभाँति सहायता करते हैं। ब्राह्मणग्रन्थों पर उपलब्ध अन्य भाष्यों का विवरण इस प्रकार है-

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. सायणाचार्य के विषय में विशेष जानकारी के लिए देखिए आचार्य बलदेव उपाध्याय की कृति आचार्य सायण और माधव हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग, 1943।
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