वैशाख

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बैशाखे शुक्लपक्षे तु तृतीयायां तथैव च।
गंगातोये नर: स्नात्वा मुच्यते सर्वकिल्विषै: ॥

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. पद्म पुराण (4.85.41-70)
  2. विष्णुधर्म0, 90.10
  3. वालपोल राहुल (कोलम्बो, 1956) द्वारा रचित 'बुद्धिज्म इन सीलोन' , पृ. 80

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