ब्रह्म कुण्ड (गोवर्धन)

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ब्रह्मकुण्ड / Brahma Kund

ब्रह्म कुण्ड, गोवर्धन
Brahma Kund, Govardhan

टीका टिप्पणी

  1. अत्रयातं ब्रह्मकुण्डं ब्रह्मणा तोषिती हरि। इन्द्रादिलोक पालाना जातानि च सरांसि च ॥
  2. -- हे महाभागे! वही गोवर्धन पर वृक्ष-लता-गुल्म के द्वारा शोभित ब्रह्मकुण्ड नामक एक सरोवर विद्यमान हैं। इसी सरोवर तट पर पुण्यप्रद व मंगलमय चार तीर्थ विराजमान हैं। सरोवर के पूर्व दिशा में इन्द्र तीर्थ, दक्षिण में यमतीर्थ, पश्चिम में वरुण तीर्थ एंव उत्तर में कुबेर तीर्थ विद्यमान हैं। मैं भी उसी सरोवर में रहते हुए इच्छानुरुप क्रीड़ा करता हूँ। "नम: कैवल्यनाथाय देवानां मुक्तिकारक!" -

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