भद्रचतुष्टय व्रत

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  1. फाल्गुन शुक्ल द्वितीया से तीन मास (त्रिपुष्कर या त्रिपुष्प),
  2. ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया से तीन मास (त्रिपुष्पक),
  3. भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से तीन मास (त्रिरामा) एवं
  4. मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा से (विष्णुपद)।

 

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. (जातिस्मर)
  2. हेमाद्रि (व्रतखण्ड 2, 383-392, भविष्योत्तरपुराण 13|1-100)

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