भीम व्रत

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'वैयाघ्र पद्मगोत्राय सांकृत्यप्रवराय च।
गंगापुत्राय भीष्माय प्रदास्येहं तिलोदकम्।।
अपुत्राय ददाम्येतत् सलिलं भीष्मवर्मणो।'

 


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हेमाद्रि (व्रत0 2, 336-341
  2. भविष्य पुराण से उद्धरण)
  3. कालविवेक (324, यहाँ पर ऐसा कहा है कि हेमाद्रि (व्रत0 2, 34 का अन्तिम श्लोक भविष्यौत्तरपुराण का है)
  4. निर्णयसिन्धु (204)
  5. समयमयूख (158-159)
  6. स्मृतिकौस्तुभ (386)
  7. भुजबल निबन्ध (पृ0 364, श्लोक 1714-15)
  8. राजमार्तण्ड (खण्ड 36, पृ0 332)
  9. हेमाद्रि (काल0 628)
  10. अग्निपुराण (205|109)
  11. गरुड़पुराण (1|123|3-11)
  12. पद्मपुराण (6|125|29-82)

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