भीष्माष्टमी

ब्रज डिस्कवरी, एक मुक्त ज्ञानकोष से
यहां जाएं: भ्रमण, खोज

'शुक्लाष्टम्यां तु माघस्य दद्याद् भीष्माय यो जलम्।
संवत्सरकृतं पापं तत्क्षणादेव नश्यति।
वैयाघ्रपद्यगोत्राय सांकृमिप्रवराय च।
अपुत्राय ददात्यम्येतत्सलिलं भीष्मवर्मणे।।'



टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हेमाद्रि (काल, 628-629)
  2. वर्षक्रियाकौमुदी (503)
  3. तिथितत्व (58)
  4. निर्णयसिन्धु (221)
  5. समयमयूख (61)
  6. (समयमयूख 61)
  7. अनुशासन पर्व महाभारत (167|28)
  8. (माघोयं समनुप्राप्तो......त्रिभागशेषः पक्षोयं शुक्लो भवितुमर्हति)
  9. जे॰ ए॰ एस॰ बी॰ (जिल्द 20, संख्या 1, पत्र, पृ0 39-41, 1954 ई0)
  10. भुजबलनिबन्ध(पृ0 364)

संबंधित लेख

निजी टूल
नामस्थान
संस्करण
क्रियाएं
सुस्वागतम्
टूलबॉक्स