माघ

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माघ माहात्म्य

  • माघमासे गमिष्यन्ति गंगायमुनसंगमे।

ब्रह्माविष्णु महादेवरूद्रादित्यमरूद्गणा:।। अर्थात ब्रह्मा, विष्णु, महादेव, रुद्र, आदित्य तथा मरूद्गण माघ मास में प्रयागराज के लिए यमुना के संगम पर गमन करते हैं।

  • प्रयागे माघमासे तुत्र्यहं स्नानस्य यद्रवेत्।

दशाश्वमेघसहस्त्रेण तत्फलं लभते भुवि।। अर्थात प्रयाग में माघ मास के अन्दर तीन बार स्नान करने से जो फल होता है वह फल पृथ्वी में दस हजार अश्वमेध यज्ञ करने से भी प्राप्त नहीं होता है।


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. पद्मपुराण, 5
  2. हेमाद्रि 5.789-794

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