मेघनाद

Nayati
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मेघनाद / Meghnad

  1. वह इन्द्रजित कहलायेगा,
  2. उसे अनेक सिद्धियां प्राप्त होंगी
  3. युद्ध से पूर्व यज्ञ करने पर अग्नि से उसके लिए घोड़े सहित रथ निकलेगा, जिन पर बैठा वह अजेय रहेगा किंतु यदि कभी यज्ञ पूरा नहीं हो पाया तो वह युद्ध में मारा जायेगा। ब्रह्मा की प्रेरणा से इन्द्र ने वैष्णव यज्ञ किया, तभी वह देवलोक का अधिपति बनने का अधिकारी हुआ। देवता-गण उसे लेकर देवलोक चले गये। [3]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. बाल्मीकि रामायण, उत्तर कांड, सर्ग 12, श्लोक 29-32
  2. बाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड, सर्ग 44, श्लोक 36, सर्ग 45|22
  3. बाल्मीकि रामायण, उत्तर कांड, सर्ग 28-29, सर्ग 30, 1-18
  4. बाल्मीकि रामायण, उत्तर कांड, सर्ग 25, श्लोक 7-10
  5. बाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड, सर्ग 85, श्लोक 11-15
  6. बाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड, सर्ग 80, श्लोक 1-11
  7. बाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड, 82|24-28|-
    बाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड, सर्ग 85, श्लोक 11-15
  8. बाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड, सर्ग 87, श्लोक 4-5
  9. बाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड, सर्ग 86 से 91,


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