अर्जुन

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==अर्जुन / Arjuna==
 
==अर्जुन / Arjuna==
*[[महाभारत]] के मुख्य पात्र हैं। महाराज पाण्डु एवं रानी [[कुन्ती]] के वह तीसरे पुत्र थे । जब पाण्डु संतान उत्पन्न करने में असफल रहे तो कुन्ती ने उनको एक वरदान के बारे में याद दिलाया । कुन्ती को कुंआरेपन में महर्षि [[दुर्वासा]] ने एक वरदान दिया था जिसमें कुंती किसी भी देवता का आवाहन कर सकती थीं और उन देवताओं से संतान प्राप्त कर सकती थी । पाण्डु एवं कुन्ती ने इस वरदान का प्रयोग किया एवं धर्मराज, वायु एवं [[इंद्र]] देवता का आवाहन किया । अर्जुन तीसरे पुत्र थे जो देवताओं के राजा इंद्र से हुए ।  
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[[चित्र:krishna-arjun1.jpg|thumb|250|अर्जुन<br /> Arjuna]]*[[महाभारत]] के मुख्य पात्र हैं। महाराज पाण्डु एवं रानी [[कुन्ती]] के वह तीसरे पुत्र थे । जब पाण्डु संतान उत्पन्न करने में असफल रहे तो कुन्ती ने उनको एक वरदान के बारे में याद दिलाया । कुन्ती को कुंआरेपन में महर्षि [[दुर्वासा]] ने एक वरदान दिया था जिसमें कुंती किसी भी देवता का आवाहन कर सकती थीं और उन देवताओं से संतान प्राप्त कर सकती थी । पाण्डु एवं कुन्ती ने इस वरदान का प्रयोग किया एवं धर्मराज, वायु एवं [[इंद्र]] देवता का आवाहन किया । अर्जुन तीसरे पुत्र थे जो देवताओं के राजा इंद्र से हुए ।  
 
*अर्जुन सबसे अच्छा तीरंदाज था । वो [[द्रोणाचार्य]] का शिष्य था जीवन मे अनेक अवसरों पर उसने इसका परिचय दिया था [[द्रौपदी]] को स्वयंम्वर मे जीतने वाला वो ही था ।
 
*अर्जुन सबसे अच्छा तीरंदाज था । वो [[द्रोणाचार्य]] का शिष्य था जीवन मे अनेक अवसरों पर उसने इसका परिचय दिया था [[द्रौपदी]] को स्वयंम्वर मे जीतने वाला वो ही था ।
 
*पांडु की जेष्ठ पत्नी वासुदेव [[कृष्ण]] की बुआ कुंती थी जिसने इंद्र के संसर्ग से अर्जुन को जन्म दिया।  कुंती का एक नाम पृथा था, इसलिए अर्जुन 'पार्थ' भी कहलाए।  वाएं हाथ से भी धनुष चलाने के कारण 'सव्यसाची' और उत्तरी प्रदेशों को जीतकर अतुल संपत्ति प्राप्त करने के कारण 'धनंजय' के नाम से भी प्रसिद्ध हुए ।  
 
*पांडु की जेष्ठ पत्नी वासुदेव [[कृष्ण]] की बुआ कुंती थी जिसने इंद्र के संसर्ग से अर्जुन को जन्म दिया।  कुंती का एक नाम पृथा था, इसलिए अर्जुन 'पार्थ' भी कहलाए।  वाएं हाथ से भी धनुष चलाने के कारण 'सव्यसाची' और उत्तरी प्रदेशों को जीतकर अतुल संपत्ति प्राप्त करने के कारण 'धनंजय' के नाम से भी प्रसिद्ध हुए ।  

10:14, 9 नवम्बर 2009 का संस्करण


अर्जुन / Arjuna

अर्जुन
Arjuna
*महाभारत के मुख्य पात्र हैं। महाराज पाण्डु एवं रानी कुन्ती के वह तीसरे पुत्र थे । जब पाण्डु संतान उत्पन्न करने में असफल रहे तो कुन्ती ने उनको एक वरदान के बारे में याद दिलाया । कुन्ती को कुंआरेपन में महर्षि दुर्वासा ने एक वरदान दिया था जिसमें कुंती किसी भी देवता का आवाहन कर सकती थीं और उन देवताओं से संतान प्राप्त कर सकती थी । पाण्डु एवं कुन्ती ने इस वरदान का प्रयोग किया एवं धर्मराज, वायु एवं इंद्र देवता का आवाहन किया । अर्जुन तीसरे पुत्र थे जो देवताओं के राजा इंद्र से हुए ।


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