यदु वंश

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यदुवंश / Yaduvansh

महाराजा यदु एक चंद्रवंशी राजा थे। वे यदु कुल के प्रथम सदस्य माने जाते है। उनके वंशज जो कि यादव के नाम से जाने जाते हैं, यदु वंशी कहलाते हैं और भारत एवं निकटवर्ती देशों मे काफ़ी संख्या में पाये जाते हैं। उनके वंशजो मे सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं पौराणिक ग्रन्थ महाभारत के महानायक भगवान श्री कृष्ण महाराज यदु का वंश परम पवित्र और मनुष्यों के समस्त पापों को नष्ट करने वाला है। जो मनुष्य इसका श्रवण करेगा, वह समस्त पापों से मुक्त हो जायगा। इस वंश में स्वयं भगवान पर ब्रह्म श्री कृष्ण ने मनुष्य के रूप में अवतार लिया था।

  1. सहस्त्रजित,
  2. क्रोष्टा,
  3. नल और
  4. रिपुं
  1. महाहय,
  2. वेणुहय और
  3. हैहय।
  1. दुर्मद और
  2. धनक।
  1. कृतवीर्य,
  2. कृताग्नि,
  3. कृतवर्मा व
  4. कृतौजा।
  1. जयध्वज,
  2. शूरसेन,
  3. वृषभ,
  4. मधु, और
  5. ऊर्जित।
  1. पुरूजित,
  2. रूक्म,
  3. रूक्मेषु,
  4. पृथु और
  5. ज्यामघ।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. चौदह रत्न ये हैं- हाथी, घोड़ा, रथ, स्त्री, बाण, ख़ज़ाना, माला, वस्त्र, वृक्ष, शक्ति, पाश, मणि, छत्र और विमान।
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