शतपथ ब्राह्मण

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शतपथ ब्राह्मण [[यजुर्वेद]] का ब्राह्मणग्रन्थ है ।
 
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शुक्ल यजुर्वेद :
 
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शतपथ ब्राह्मण (माध्यन्दिनि शाखा)
 
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यजुर्वेद संहिता - इस वेद की दो संहितायें हैं
 
यजुर्वेद संहिता - इस वेद की दो संहितायें हैं
एक शुक्ल : शुक्ल यजुर्वेद याज्ञवल्क्य को प्राप्त हुआ । उसे `वाजसनेयि-संहिता´ भी कहते हैं ।`वाजसनेयि-संहिता´ की 17 शाखायें हैं । उसमें 40 अध्याय हैं । उसका प्रत्येक अध्याय कण्डिकाओं में विभक्त है, जिनकी संख्या 1975 है । इसके पहले के 25 अध्याय प्राचीन माने जाते हैं और पीछे के 15 अध्याय बाद के । इसमें दर्श पौर्णमास, अग्निष्टोम, वाजपेय, अग्निहोत्र, चातुर्मास्य, अश्वमेध, पुरूषमेध आदि यज्ञों के वर्णन है ।
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दूसरी कृष्ण : कृष्ण-यजुर्वेद-संहिता शुक्ल से की है । उसे `तैत्तिरिय-संहिता´ भी कहते हैं । यजुर्वेद के कुछ मन्त्र ऋग्वेद के हैं तो कुछ अथर्ववेद के हैं । `तैत्तिरिय-संहिता´ 7 अष्टकों या काण्डों में विभक्त है । इस संहिता में मन्त्रों के साथ ब्राह्मण का मिश्रण है । इसमें भी अश्वमेध, ज्योतिष्टोम, राजसूय, अतिरात्र आदि यज्ञों का वर्णन है ।
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एक शुक्ल :
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शुक्ल यजुर्वेद याज्ञवल्क्य को प्राप्त हुआ । उसे `वाजसनेयि-संहिता´ भी कहते हैं ।`वाजसनेयि-संहिता´ की 17 शाखायें हैं । उसमें 40 अध्याय हैं । उसका प्रत्येक अध्याय कण्डिकाओं में विभक्त है, जिनकी संख्या 1975 है । इसके पहले के 25 अध्याय प्राचीन माने जाते हैं और पीछे के 15 अध्याय बाद के । इसमें दर्श पौर्णमास, अग्निष्टोम, वाजपेय, अग्निहोत्र, चातुर्मास्य, अश्वमेध, पुरूषमेध आदि यज्ञों के वर्णन है ।
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दूसरी कृष्ण :
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कृष्ण-यजुर्वेद-संहिता शुक्ल से की है । उसे `तैत्तिरिय-संहिता´ भी कहते हैं । यजुर्वेद के कुछ मन्त्र ऋग्वेद के हैं तो कुछ अथर्ववेद के हैं । `तैत्तिरिय-संहिता´ 7 अष्टकों या काण्डों में विभक्त है । इस संहिता में मन्त्रों के साथ ब्राह्मण का मिश्रण है । इसमें भी अश्वमेध, ज्योतिष्टोम, राजसूय, अतिरात्र आदि यज्ञों का वर्णन है ।

12:45, 15 मई 2009 का संस्करण

शतपथ ब्राह्मण

शतपथ ब्राह्मण यजुर्वेद का ब्राह्मणग्रन्थ है ।

यजुर्वेद

शुक्ल यजुर्वेद :

शतपथ ब्राह्मण (माध्यन्दिनि शाखा)

शतपथ ब्राह्मण (काण्व शाखा)

यजुर्वेद संहिता - इस वेद की दो संहितायें हैं

एक शुक्ल :

शुक्ल यजुर्वेद याज्ञवल्क्य को प्राप्त हुआ । उसे `वाजसनेयि-संहिता´ भी कहते हैं ।`वाजसनेयि-संहिता´ की 17 शाखायें हैं । उसमें 40 अध्याय हैं । उसका प्रत्येक अध्याय कण्डिकाओं में विभक्त है, जिनकी संख्या 1975 है । इसके पहले के 25 अध्याय प्राचीन माने जाते हैं और पीछे के 15 अध्याय बाद के । इसमें दर्श पौर्णमास, अग्निष्टोम, वाजपेय, अग्निहोत्र, चातुर्मास्य, अश्वमेध, पुरूषमेध आदि यज्ञों के वर्णन है ।

दूसरी कृष्ण :

कृष्ण-यजुर्वेद-संहिता शुक्ल से की है । उसे `तैत्तिरिय-संहिता´ भी कहते हैं । यजुर्वेद के कुछ मन्त्र ऋग्वेद के हैं तो कुछ अथर्ववेद के हैं । `तैत्तिरिय-संहिता´ 7 अष्टकों या काण्डों में विभक्त है । इस संहिता में मन्त्रों के साथ ब्राह्मण का मिश्रण है । इसमें भी अश्वमेध, ज्योतिष्टोम, राजसूय, अतिरात्र आदि यज्ञों का वर्णन है ।
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