यजुर्वेद

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यजुर्वेद / Yajurveda

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  • यजुर्वेद गद्यात्मक है।
  • यज्ञ में कहे जाने वाले गद्यात्मक मन्त्रों को ‘यजुस’ कहा जाता है।
  • यजुर्वेद के पद्यात्मक मन्त्र ॠग्वेद या अथर्ववेद से लिये गये है।
  • इनमें स्वतन्त्र पद्यात्मक मन्त्र बहुत कम हैं।
  • यजुर्वेद में यज्ञों और हवनों के नियम और विधान हैं।
  • यह ग्रन्थ कर्मकाण्ड प्रधान है।
  • यदि ॠग्वेद की रचना सप्त-सिन्धु क्षेत्र में हुई थी तो यजुर्वेद की रचना कुरुक्षेत्र के प्रदेश में।
  • इस ग्रन्थ से आर्यों के सामाजिक और धार्मिक जीवन पर प्रकाश पड़ता है।
  • वर्ण-व्यवस्था तथा वर्णाश्रम की झाँकी भी इसमें है।

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