नल

ब्रज डिस्कवरी एक ज्ञानकोश
यहां जाएं: भ्रमण, खोज

नल / Nal

दक्षिण में समुद्र के किनारे पहुंचकर राम ने समुद्र की आराधना की। प्रसन्न होकर वरुणालय ने सगरपुत्रों से संबंधित होकर अपने को इक्ष्वाकुवंशीय बतलाकर राम की सहायता करने का वचन दियां उसने कहा-'सेना में नल नामक विश्वकर्मा का पुत्र है। वह अपने हाथ से मेरे जल में जो कुछ भी छोड़ेगा वह तैरता रहेगा, डूबेगा नहीं।' इस प्रकार समुद्र पर पुल बना जो 'नलसेतु' नाम से विख्यात है। [1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. महाभारत, वनपर्व, अध्याय 283, श्लोक 24 से 45 तक


अन्य लिंक

निजी टूल
नामस्थान
संस्करण
क्रियाएं
भ्रमण
टूलबॉक्स
अन्य भाषाएं
सुस्वागतम्