बुध

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बुध / Budh

'ॐ उद्बुध्यस्वान्गे प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते सँ सृजेथामयं च।
अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वेदेवा यजमानश्च सीदत॥',

पौराणिक मन्त्र-

'पियंगुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥',

बीज मन्त्र-

'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:', तथा

सामान्य मन्त्र-

'ॐ बुं बुधाय नम:' है। इनमें से किसी का भी नित्य एक निश्चित संख्या में जप करना चाहिये। जप की कुल संख्या 9000 तथा समय 5 घड़ी दिन है। विशेष परिस्थिति में विद्वान ब्राह्मण का सहयोग लेना चाहिये।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. (मत्स्यपुराण 24।1-2)
  2. श्रीमद्भागवत(5।22-13)

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