शिवलिंग

ब्रज डिस्कवरी, एक मुक्त ज्ञानकोष से
यहां जाएं: भ्रमण, खोज
गंधर्वो द्वारा शिवलिंग की पूजा, राजकीय संग्रहालय, मथुरा
Workship By Gandharv of Shiva Linga, Govt. Museum, Mathura

शिवलिंग / Shivling

शिवलिंग, राजकीय संग्रहालय, मथुरा
Shivling Figure, Mathura Museum
  1. लोक,
  2. क्रिया,
  3. सनातन गृह,
  4. पंचभूत तथा
  5. मनुष्य। रुद्र ने लोक यज्ञ तथा मनुष्य यज्ञों से पांच हाथ लंबा धनुष बनाया। पुरोहित ही उसकी प्रत्यंचा थी।



शिवलिंग, नीलकन्ठेश्वर महादेव मन्दिर, मथुरा
Shivling, Neelkantheshwar Mahadev Temple, Mathura
  1. स्नान,
  2. दान,
  3. होम और
  4. जप शिव के कवच बने। उन्हें धनुष उठाए देख पृथ्वी भयभीत होकर कांपने लगी। देवताओं के यज्ञ में, वायु की गति के रुकने, समिधा आदि के प्रज्वलित न होने, सूर्य, चंद्र आदि के श्रीहीन होने से व्याघात उत्पन्न हो गया। देवता भयातुर हो उठे। रुद्र ने भयंकर बाण से यज्ञ का हृदय भेद दिया- वह मृग का रूप धारण कर वहां से भाग चला। रुद्र ने उसका पीछा किया- वह मृगशिरा नक्षत्र के रूप में आकाश में प्रकाशित होने लगा। रुद्र उसका पीछा रकते हुए आर्द्रा नक्षत्र के रूप में प्रतिभासित हुए। यज्ञ के समस्त अवयव वहां से पलायन करने लगे। रुद्र ने सविता की दोनों बांहें काट डालीं तथा भग की आंखें और पूषा के दांत तोड़ डाले। भागते हुए देवताओं का उपहास करते हुए शिव ने धनुष की कोटि का सहारा ले सबको वहीं रोक दिया। तदनंतर देवताओं की प्रेरणा से वाणी ने महादेव के धनुष की प्रत्यंचा काट डाली, अत: धनुष उछलकर पृथ्वी पर जा गिरा। तब सब देवता मृग-रूपी यज्ञ को लेकर शिव की शरण में पहुंचें शिव ने उन सब पर कृपा कर अपना कोप समुद्र में छोड़ दिया जो बड़वानल बनकर निरंतर उसका जल सोखता है। शिव ने पूषा को दांत, भग की आंखें तथा सविता को बांहें प्रदान कर दीं तथा जगत एक बार फिर से सुस्थिर हो गया।*\



सती वियोग में शिव

शिवलिंग, चिन्ता हरण आश्रम, महावन
Shivling, Chinta Haran Ashram, Mahavan

सती की मृत्यु के उपरांत उनके वियोग में शिव नग्न रूप में भटकने लगे। वन में घूमते शिव को देख मुनिपत्नियां आसक्त होकर उनसे चिपट गयीं। यह देखकर मुनिगण रुष्ट हो उठे। उनके शाप से शिव का लिंग पृथ्वी पर गिर पड़ा। लिंग पाताल पहुंच गया। शिव क्रोधवश तरह-तरह की लीला करने लगे। पृथ्वी पर प्रलय के चिह्न दिखायी दिए। देवताओं ने शिव से प्रार्थना की कि वे लिंग धारण करें। वे उसकी पूजा का आदेश देकर अंतर्धान हो गये। कालांतर में प्रसन्न होकर उन्होंने लिंग धारण कर लिया तथा वहां पर प्रतिमा बनाकर पूजा करने का आदेश दिया।*

सम्बंधित लिंक

निजी टूल
नामस्थान
संस्करण
क्रियाएं
सुस्वागतम्
टूलबॉक्स
अन्य भाषाएं