द्रोणाचार्य

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द्रोणाचार्य / Dronacharya

द्रोणाचार्य
Dronacharya

महाभारत में द्रोणाचार्य ने एक विशेष युद्ध योजना बनाई जिसे चक्रव्यूह रचना कहते थे, जिसमें अर्जुन का पुत्र अभिमन्यु मारा गया। महाभारत युद्ध में भीष्म पितामह के बाद मुख्य सेनापति का पद द्रोणाचार्य के पास रहा था। द्रोणाचार्य ब्रह्मास्त्र का प्रयोग जानते थे। ब्रह्मास्त्र को प्रयोग करने की विधी उन्होंने अपने पुत्र अश्वत्थामा को भी सिखा रक्खी थी जिसका प्रयोग उसने महाभारत के बाद पाड़वों के वंश का समूल नाश करने हेतु अर्जुन की पुत्रवधू उत्तरा के गर्भ को नष्ट करने के लिए किया था। कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में जाकर अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित की रक्षा की थी क्योंकि सम्पूर्ण कुरुवंश के अन्तिम राजा परीक्षत ही थे। द्रोणाचार्य की मृत्यु द्रौपदी के भाई द्रष्टद्युम्न के हाथों हुई। महाभारत युद्ध में भीम ने शोर मचाया कि अश्वत्थामा मारा गया। द्रोणाचार्य ने यह सुनकर युधिष्ठर की तरफ देखा। युधिष्ठर ने कहा,"अश्वत्थामा हतोहतः नरो वा कुंजरो वा।" यह सुनकर पुत्र शोक में द्रोणाचार्य समाधिस्थ हो गये। इस का लाभ उठाकर द्रष्टद्युम्न ने द्रोणाचार्य का सिर धड़ से अलग कर दिया उसने अपने पिता द्रुपद के अपमान का बदला लेने को द्रोणाचार्य का वध करने की प्रतिज्ञा की थी।

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