मंगलवार

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*जापान में मंगलवार को 'कायोबी' अर्थात 'आग का दिन' माना जाता है।  
 
*जापान में मंगलवार को 'कायोबी' अर्थात 'आग का दिन' माना जाता है।  
 
*रोमन केलैंण्डर में 'तीसरे दिन' को मंगल कहा जाता है।
 
*रोमन केलैंण्डर में 'तीसरे दिन' को मंगल कहा जाता है।
*मंगलवार [[सोमवार]] के बाद और [[बुधवार]] से 
 
 
*इस दिन [[मंगल देवता|मंगल]] की पूजा की जाती है।
 
*इस दिन [[मंगल देवता|मंगल]] की पूजा की जाती है।
 
*आथर्वणपरिशिष्ट <ref>हेमाद्रि, व्रत0 2, 626 में उद्धृत</ref> के अनुसार [[ब्राह्मण]], गाय, अग्नि, भूमि, सरसों, घी, शमी, चावल एवं जौ आठ शुभ वस्तुएँ हैं।  
 
*आथर्वणपरिशिष्ट <ref>हेमाद्रि, व्रत0 2, 626 में उद्धृत</ref> के अनुसार [[ब्राह्मण]], गाय, अग्नि, भूमि, सरसों, घी, शमी, चावल एवं जौ आठ शुभ वस्तुएँ हैं।  
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*मंगलवार को मंगल पूजा करनी चाहिए।  
 
*मंगलवार को मंगल पूजा करनी चाहिए।  
 
*प्रातःकाल मंगल के नामों का जाप (कुल 21 नाम हैं, यथा–मंगल, कुज, लोहित, यम, सामवेदियो के प्रेमी); एक त्रिभुजाकार चित्र, बीच में छेद; कुंकुम एवं लाल चन्दन से प्रत्येक कोण पर तीन नाम (आर, वक्र एवं कुंज) लिखे जाते हैं।  
 
*प्रातःकाल मंगल के नामों का जाप (कुल 21 नाम हैं, यथा–मंगल, कुज, लोहित, यम, सामवेदियो के प्रेमी); एक त्रिभुजाकार चित्र, बीच में छेद; कुंकुम एवं लाल चन्दन से प्रत्येक कोण पर तीन नाम (आर, वक्र एवं कुंज) लिखे जाते हैं।  
*ऐसी मान्यता है कि मंगल का जन्म [[उज्जयिनी]] में [[भारद्वाज]] कुल में हुआ था और वह मेढ़ा (मेष) की सवारी करता है।  
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*ऐसी मान्यता है कि मंगल का जन्म [[उज्जयिनी]] में [[भारद्वाज]] कुल में हुआ था और वह मेढ़ा (मेष) की सवारी करता है।
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*यदि कोई जीवन भर इस व्रत का करे तो वह समृद्धिशाली, पुत्र पौत्रवान हो जाता है और गहों के लोक में पहुँच जाता है; <ref>हेमाद्रि (व्रत0 2, 568-574, पद्मपुराण से उद्धरण</ref>, <ref>वर्षकृत्यदीपक (443-451) में भौमव्रत तथा व्रतपूजा का विस्तृत उल्लेख है</ref>।  
 
*यदि कोई जीवन भर इस व्रत का करे तो वह समृद्धिशाली, पुत्र पौत्रवान हो जाता है और गहों के लोक में पहुँच जाता है; <ref>हेमाद्रि (व्रत0 2, 568-574, पद्मपुराण से उद्धरण</ref>, <ref>वर्षकृत्यदीपक (443-451) में भौमव्रत तथा व्रतपूजा का विस्तृत उल्लेख है</ref>।  
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==
 
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==

11:16, 12 नवम्बर 2011 का संस्करण

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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हेमाद्रि, व्रत0 2, 626 में उद्धृत
  2. महाभारत द्रोणपर्व (127|14
  3. द्रोणपर्व (82|20-22
  4. वामनपुराण (14|36-37
  5. स्मृतिचन्द्रिका 1, पृ0 168 द्वारा उद्धृत
  6. अन्य मंगलमय वस्तुओं के लिए देखिए पराशर (12|47), विष्णुधर्मोत्तरपुराण (2|163|18
  7. हेमाद्रि (व्रत0 2, 567, भविष्योत्तरपुराण से उद्धरण
  8. हेमाद्रि (व्रत0 2, 568-574, पद्मपुराण से उद्धरण
  9. वर्षकृत्यदीपक (443-451) में भौमव्रत तथा व्रतपूजा का विस्तृत उल्लेख है

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