कोटि तीर्थ

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कोटि तीर्थ / Koti Tirth

तत्रैव कोटितीर्थ तु देवानामपि दुर्ल्लभम्।
तत्र स्नानेन दानेन मम लोके महीयते।।
चक्रतीर्थं तु विख्यातं माथुरे मम मण्डले।
यस्तत्र कुरुते स्नानं त्रिरात्रोपोषितो नर:।
स्नानमात्रेण मनुजो मुख्यते ब्रह्महत्यया।।


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