कुण्डिकोपनिषद

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कुण्डिकोपनिषद

संन्यासी की अन्तर्मुखी साधनाएं

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. आकाशवत्कल्पविदूरगोऽहमादित्यवद्भास्यविलक्षणोऽहम्। अहार्यवन्नित्याविनिश्चलोऽहमम्भोधिवत्पाराविवर्जितोऽहम्॥16॥


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