माण्डूक्योपनिषद

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माण्डूक्योपनिषद

ॐ की तीन मात्राएं- अ, उ, म् हैं। यह विश्व त्रियामी है। भूत, भविष्य और वर्तमान काल भी इसकी तीन मात्राएं हैं। ये सत्, रज और तम की प्रतीक हैं। ज्ञान द्वारा ही परमात्मा के इस चेतन-अचेतन स्वरूप को जाना जा सकता है। उसे वाणी से प्रकट करना अत्यन्त कठिन है। उसे अनुभव किया जा सकता है। एक आत्मज्ञानी साधक अपने आत्मज्ञान के द्वारा ही आत्मा को परब्रह्म में प्रविष्ट कराता है और उससे अद्वैत सम्बन्ध स्थापित करता है।


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