देवताध्याय ब्राह्मण

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देवताध्याय ब्राह्मण / Devtadhyay Brahman

देवताध्याय ब्राह्मण का आकार अत्यन्त अल्प है और इसमें केवल 4 खण्ड हैं। कतिपय हस्तलेखों और प्रकाशित संस्करणों में मात्र तीन ही खण्ड हैं। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इसमें मुख्य रूप से निधन-भेद से सामों के देवताओं का निरूपण हुआ है।

देवता-ब्राह्मण में सामगानों के सूक्तों तथा ॠचाओं के नहीं, देवताओं के निर्णय की प्रक्रिया का कथन है। साम-गान के देवताओं के रूप में सर्वप्रथम अग्नि, इन्द्र, प्रजापति, सोम, वरुण, त्वष्टाङिगरस, पूषा, सरस्वती देवी और इन्द्राग्नी का उल्लेख है। विभिन्न छन्दों के नाम-निर्वचनों का निरुक्त से सादृश्य है। प्रतीत होता है कि दोनों ने ही इन्हें किसी अन्य ब्राह्मण ग्रन्थ से लिया है, क्योंकि दोनों ही किसी ब्राह्मण ग्रन्थ का उल्लेख करते हैं। सम्पूर्ण देवताध्याय ब्राह्मण में सूत्र-शैली का प्रयोग हुआ है। देवताध्याय ब्राह्मण के दो संस्करण अब तक मुद्रित हुए हैं-

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. साम्नां निधनभेदेन देवताश्यनादयम्। ग्रन्थोंऽपि नामतोऽन्वर्थाद् देवताध्याय उच्यते॥
    तत्राद्ये बहुधा साम्नां देवता: परिकीर्तिता:। द्वितीये छन्दसां वर्णास्तेषामेव च देवता:। तृतीये तन्निरुक्तिश्चेत्येवं खण्डार्थसंग्रह:॥

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