संन्यासोपनिषद

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संन्यासोपनिषद

सामवेद से सम्बद्ध इस उपनिषद में मात्र दो अध्याय हैं।

  1. 'कुटीचक्र',
  2. 'बहूदक',
  3. 'हंस',
  4. 'परमहंस',
  5. 'तुरीयातीत' और
  6. 'अवधूत' आदि – का उल्लेख किया गया है। इसी क्रम में उपनिषदकार ने 'आत्मज्ञान' को स्थिति और स्वरूप का भी वर्णन किया है।

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