गोपालपूर्वतापनीयोपनिषद

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गोपालपूर्वतापनीयोपनिषद

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कृष्णं तं विप्रा बहुधा यजन्ति गोविंद सन्तं बहुधाऽऽराधयन्ति।
    गोपीजनवल्लभो भुवनानि दध्रे स्वाहाश्रितो जगदैजत्सुरेता:॥16॥


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